होली हे


होली हे

होली हे होली हे होली हे,
होली हे होली हे होली हे।
जिहाँ दया के चिन्हा अउ मया के बोली हे,
होली हे होली हे होली हे.....

कलजुग मा उराठिल मनखे के भाषा,
पइसावाला बोलय पइसा के भाषा।
गाँव-शहर मा नइ दिखय कान्हा के बासा,
जिहाँ पियास बुझावय सुदामा सहीं पियासा।
कलजुग मा कान्हा के,सुदामा कहाँ हमजोली हे।
होली हे होली हे होली हे.....

सुनता के सरु गाय घरोघर खोरी।
नान्हें करय बड़का से मुँहजोरी।
परिवार मा नइहे बेटा-बहू संस्कारी।
निष्काम प्रेम के जे मारय पिचकारी।
कलजुग मा सीता-राम सहीं बहू-बेटा के कहाँ जोड़ी हे।
 होली हे होली हे होली हे.....

कलजुग मा नइहे करण सहीं एक्कोझन दानी।
महर्षि दधीचि के हाड़ा सुनावय बलिदान के कहानी।
अब दान-धरम के रंग मा होली खेलय,कलजुग के महादानी।
सोशल मीडिया मा फोटू भेजय,दिखावा के चढ़य छानी।
परमारथ के करमभूमि मा नि:स्वारथ के कहाँ डोली हे।
होली हे होली हे होली हे.....

जीतेन्द्र निषाद'चितेश'
सांगली,जिला-बालोद

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