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सेल्फी के धुन

सेल्फी के धुन म,सून होगे पुन। निकलै दिखावा म दिन छुन छुन। नेकी कर सोशल मीडिया म डाल। बता अपन करनी के जम्मो हाल। इही चरित्तर हे लोभ के देश-दुनिया म। काम कोन करे नि:सुवारथ के गुनिया म? अपन चोला तरी धीरे धीरे गुन। सेल्फी के धुन म,सून होगे पुन। जेवनी हाथ के करनी,डेरी हाथ झन जाने। अइसन हो करनी,ऊपरवाला तोला माने। करके भलाई,कलेचुप,घर निकल भाई। मनखे करे चाहै तोर बुराई या बड़ाई। बिना शोर,हिरदै के गोठ सुन। सेल्फी के धुन म,सून होगे पुन। जीतेन्द्र निषाद'चितेश'

नेतामन भगवान होगे

कलजुग म नेता मन भगवान होगे जी। हरेक मंच म उही मन बिराजमान होगे जी। राजनीति म जे लफरहा खिलाड़ी। पावै बड़ मान,होवै ओकर पुछारी। गाँव-शहर म चमचा मन बलावै। धरम के मंच म धर्मात्मा बन जावै। फेर दया धरम बिन महात्मा सही महान होगे जी। कलजुग म नेता मन भगवान होगे जी। बने मनखे के गोठ म ताली नइ बाजै। राजनेता के लबारी म परजा ह नाचै। गिरगिट घलो शरमा जाय रंग बदले म। राजनेता नइ शरमाय घोषणा के चाल चले म। फेर घोषणा पूरा करै बिन,सुवागत सम्मान होगे जी। कलजुग म नेता मन भगवान होगे जी। जब पधारै कोनो कार्यक्रम के ठीहा म। माई पहुना बन,दिन रहै या रतिहा म। तलवा चाटै गाँव-शहर म चापलूस बनके। पढ़-लिख के हुसियार मन नेता मन के। फेर गाँव घर के मनखे ल पहुना नइ बनाय,का शैतान होगे जी? कलजुग म नेता मन भगवान होगे जी। जीतेन्द्र निषाद'चितेश'

बिजली हाफ

सौ यूनिट तक छूट और बाकी जो बचे उसे लूट। बिजली बिल हाफ ये सरकार की नीति है कूट। डबल इंजन व्यापारी सरकार की देखो ऐसी करतूत। आम आदमी के आमदनी में लग गई नजर की छूत। ये वादाखिलाफी छत्तीसगढ़ सरकार की दुखदाई। किसी भी राज्य में न बनाना उनकी सरकार भाई। अगर आपको लगता हैं कि ये प्रजा हितैषी पार्टी हैं। तो फिर जायजा लीजिए वहाँ,क्या ये दुख के साथी है? जीतेन्द्र निषाद"चितेश"

गंदगी

प्रेम की कमी है मेरी जिंदगी में। क्रोध की अति है मेरी जिंदगी में। क्या कहूँ अपने बारे में दुनिया वालों, जीना मुश्किल है खुद की गंदगी में। जीतेन्द्र निषाद"चितेश"

पार्किंग

गाड़ी ल मंच के आघू म रखके गैरी झन मताव जी। बोल दीही कोनो त बकबक करके झन सताव जी। रामसत्ता मंच के तीर,पार्किंग ल देख मोर मन होय अधीर जी। दर्शक मन बइठही कहाँ?बारिश म मैं खोजँव तदबीर जी। सियान बनके अड़हा झन बनव गाँव के सियान मन। गाड़ी ल पार्किंग म रखके,दिखाव सज्जनता सब झन। बने मनखे ल चार समाज म बुलाके झन करहू बदनाम जी। बोलो एक घांँव प्रेम से जय श्री राम,जय राम जी। जीतेन्द्र निषाद"चितेश"

किसानी काम करता हूँ

किसानी काम करता हूँ,किसानी काम करता हूँ। मेहनत की रोटी से अपनों का पेट भरता हूँ। खेती में कभी लाभ होता है, और कभी हानि होती है। कभी सिर पर कर्ज चढ़ जाता है, तो कभी जीने में परेशानी होती है। फिर भी अपने कर्म पथ पर अडिग रहता हूँ। किसानी काम करता हूँ,किसानी काम करता हूँ। कीमत बढ़ गई,दवाई-खाद की, आमदनी घट गई,अवनि के औलाद की। मजे में है नेता-अभिनेता,व्यापारी और कर्मचारी, कौन सुनेगा?कौन देखेगा?किसान की लाचारी। अपने आप से ही,पागलों की तरह बात करता हूँ। किसानी काम करता हूँ,किसानी काम करता हूँ। मौसम भी कड़ी परीक्षा लेता है,धरती के भगवान की, कैसे सोयी किस्मत जागेगी,मेहनतकश किसान की? सावन-भादों में कभी फसलें,बिन बारिश मर जाती है, और बैसाख-जेठ में बारिश,फसलों को डुबोकर जाती  है। ऐसी दशा में भी खुशी-खुशी,विधि के विधान को प्रणाम करता हूँ। किसानी काम करता हूँ,किसानी काम करता हूँ। जीतेन्द्र निषाद 'चितेश' सांगली,जिला-बालोद

जब जब राज्य में व्यापारी सरकार

जब जब राज्य में व्यापारी सरकार। मजदूर करें बस की सवारी हर बार। मालवाहक से ले जाने पर सरकार करें सख्ती। लोगों को बिठाकर काम में ले जाना बड़ी गलती। पुलिस के पकड़ में आ जाओगे कटेगा चालान। भारी भरकम राशि का करना पड़ेगा भुगतान। सभी द्वारपाल मजे से करें ये कारोबार। जब जब राज्य में व्यापारी सरकार। लोगों को बुलाकर चुनावी सभा में मुखिया करें मस्ती। मालवाहक से ले जाकर सदा सजाए सभा की बस्ती। नियम की अनदेखी कर,कानून को आँख दिखाकर। घमंड से सिर ऊँचा कर,चले जनता के नौकर चाकर। फिर वही काम जनता करें,बनाए अपराधी खूंखार। जब जब राज्य में व्यापारी सरकार। उस गाँव के किसान कैसे किसानी करें मुखिया। जहाँ ढूँढने से भी न मिलें एक मजदूर बुढ़िया। वहाँ मालवाहक से मजदूर ले जाकर होती थी किसानी। बस से होती है लागत में इजाफा,मुनाफा में हानि। जरा उस गाँव के किसान की भी सुनो पुकार। जब जब राज्य में व्यापारी सरकार। मजदूर करें बस की सवारी हर बार। जीतेन्द्र निषाद"चितेश"