हे गणपति महराज
हे गणपति महराज,हे गणपति महराज। अब कान्हा सही आके बचा दे हमर लाज। जब गाँव-गली खोर म ठाड़े हे,कतको झन बनके दुःशासन अउ रावण। अरे!घर म सग्गे भाई-बाप घलो करै शोषण,अब कइसे होगे मनखेमन? तब घर-बन के बैरी ले कोन बचाही हम ला आज? हे गणपति महराज,हे गणपति महराज। अब कान्हा सही आके बचा दे हमर लाज। बिक्कट होवत हे दुराचार अबला समझ के,नारी अउ अबोध लड़की सन। जेन नइ देखे राहय जिनगी के एको बसंत,तेकर बर मरद बनै जबरन। दुराचारी मरद के शिकार बर तोला बने ल परही बाज। हे गणपति महराज,हे गणपति महराज। अब कान्हा सही आके बचा दे हमर लाज। जेन पशु बरोबर करै बेवहार,भाग मढ़ा दे वोकर गरदन काट के। जेन लबारी के दलील दे अदालत म हवसी बर मार चूंदी हपाट के। अइसन कानून बने तभ्भे नियाव पाही तिरिया समाज। हे गणपति महराज,हे गणपति महराज। अब कान्हा सही आके बचा दे हमर लाज। जीतेन्द्र निषाद'चितेश'