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हे गणपति महराज

हे गणपति महराज,हे गणपति महराज। अब कान्हा सही आके बचा दे हमर लाज। जब गाँव-गली खोर म ठाड़े हे,कतको झन बनके दुःशासन अउ रावण। अरे!घर म सग्गे भाई-बाप घलो करै शोषण,अब कइसे होगे मनखेमन? तब घर-बन के बैरी ले कोन बचाही हम ला आज? हे गणपति महराज,हे गणपति महराज। अब कान्हा सही आके बचा दे हमर लाज। बिक्कट होवत हे दुराचार अबला समझ के,नारी अउ अबोध लड़की सन। जेन नइ देखे राहय जिनगी के एको बसंत,तेकर बर मरद बनै जबरन। दुराचारी मरद के शिकार बर तोला बने ल परही बाज। हे गणपति महराज,हे गणपति महराज। अब कान्हा सही आके बचा दे हमर लाज। जेन पशु बरोबर करै बेवहार,भाग मढ़ा दे वोकर गरदन काट के। जेन लबारी के दलील दे अदालत म हवसी बर मार चूंदी हपाट के। अइसन कानून बने तभ्भे नियाव पाही तिरिया समाज। हे गणपति महराज,हे गणपति महराज। अब कान्हा सही आके बचा दे हमर लाज। जीतेन्द्र निषाद'चितेश'

मटकी ल फोड़

मटकी ल फोड़,पइसा बटोर,सुन ले संगी मोर। कोशिश कर ले आके तहूँ ,एक घाँव जी तोड़ । डोकरी घलो हवय रेस म,डोकरा घलो हवय टेस म। आँखी म बाँध मया के पट्टी,अरे! मया के बंधना ल छोड़। जिनगी का हे?सुख-दुख के मेला,ये तन का हे? माटी के ढेला। ये जग ल छोड़ तैं जाबे अकेला,अब हरि ले नाता जोड़। सबले बड़का ऊपरवाला खिलाड़ी,बाकी जम्मो झन हवय अनाड़ी। करम के लाठी तोर हाथ म,सत के रद्दा ले कभू  मुँहू झन मोड़। कइसन मटकी ल तैहा फोड़बे,कइसन पइसा ल तैहा बटोरबे? गरब के मटकी ल तैहा फोड़,हरिनाम के पइसा ल तैहा बटोर। मटकी ल फोड़,पइसा बटोर,सुन  ले संगी मोर। कोशिश कर ले आके तहूँ ,एक घाँव जी तोड़। जीतेन्द्र निषाद'चितेश'

सारी के बिहाव म

सारी के बिहाव म भांटो नाचै अकेल्ला अकेल्ला। सजनी बिन सारी प्यारी,भागै दुम दबाके पल्ला। आके सारी मोर संग नाच लव,कनिहा जोरी जोरी। साढ़हू घलो संग म हावय,मजा आही थोरी थोरी। सास के बाद डेड़ सास हे,यहू नत्ता खासमखास हे। बड़का साढ़हू,बड़का भइया,लागै अभी तीजा उपास हे। सास लागै महतारी बरोबर फेर देथे अब्बड़ गारी। छितका कुरिया के तोर बेटी लागै सौंहत राजकुमारी। गंजहा नइ हँव,मंदहा नइ हँव,हांँवव मैं बेलबेलहा। फेर बारी-बखरी बुता करथँव,नइ राहंँव मैं ठेलहा। जीतेन्द्र निषाद'चितेश'

इंसाफ बचा कहाँ है?

कलयुग में गरीब के लिए इंसाफ बचा कहाँ है? और दौलतमंद के लिए कानून में सजा कहाँ है? यही सच्चाई है इस दुनिया की खासकर भारत की। यहाँ ईमान भी बिक जाता है ताकत देख दौलत की। फिर अपराधी को कब,कहाँ और कैसे सजा मिलेगी? अरे!वकील के अच्छे दलील से,जिंदगी भर मजा मिलेगी। जीतेन्द्र निषाद"चितेश"

नेतामन भगवान

कलजुग म नेता मन भगवान होगे जी। हरेक मंच म उही मन बिराजमान होगे जी। राजनीति म जे लफरहा खिलाड़ी। पावै बड़ मान,होवै ओकर पुछारी। गाँव-शहर म पुजारी मन बलावैं धरम के मंच म धर्मात्मा बन जावै। फेर दया धरम बिन लफरहा मन, काबर महात्मा सही महान होगे जी? कलजुग म नेता मन भगवान होगे जी। बने मनखे के गोठ म ताली नइ बाजै। राजनेता के लबारी म परजा ह नाचै। गिरगिट घलो शरमा जाय रंग बदले म। राजनेता नइ शरमाय घोषणा के चाल चले म। फेर घोषणा पूरा करै बिन हर जघा, लबरा मन के काबर सम्मान होगे जी? कलजुग म नेता मन भगवान होगे जी। जब पधारै कोनो कार्यक्रम के ठीहा म। तब माई पहुना बन,दिन रहै या रतिहा म। सामाजिक-धार्मिक मंच म अंधभगत बनके। पूजा करै,पढ़-लिख के हुसियार मन नेता मन के। फेर हुसियार मन के नजर म माई पहुना बर, गाँव-घर के बने मनखे मन काबर शैतान होगे जी? कलजुग म नेता मन भगवान होगे जी। हरेक मंच म उही मन बिराजमान होगे जी। जीतेन्द्र निषाद'चितेश'

सेल्फी के धुन

सेल्फी के धुन म,सून होगे पुन। निकलै दिखावा म दिन छुन छुन। नेकी कर सोशल मीडिया म डाल। बता अपन करनी के जम्मो हाल। इही चरित्तर हे लोभ के देश-दुनिया म। काम कोन करे नि:सुवारथ के गुनिया म? अपन चोला तरी धीरे धीरे गुन। सेल्फी के धुन म,सून होगे पुन। जेवनी हाथ के करनी,डेरी हाथ झन जाने। अइसन हो करनी,ऊपरवाला तोला माने। करके भलाई,कलेचुप,घर निकल भाई। मनखे करे चाहै तोर बुराई या बड़ाई। बिना शोर,हिरदै के गोठ सुन। सेल्फी के धुन म,सून होगे पुन। जीतेन्द्र निषाद'चितेश'

बिजली हाफ

सौ यूनिट तक छूट और बाकी जो बचे उसे लूट। बिजली बिल हाफ ये सरकार की नीति है कूट। डबल इंजन व्यापारी सरकार की देखो ऐसी करतूत। आम आदमी के आमदनी में लग गई नजर की छूत। ये वादाखिलाफी छत्तीसगढ़ सरकार की दुखदाई। किसी भी राज्य में न बनाना उनकी सरकार भाई। अगर आपको लगता हैं कि ये प्रजा हितैषी पार्टी हैं। तो फिर जायजा लीजिए वहाँ,क्या ये दुख के साथी है? जीतेन्द्र निषाद"चितेश"