अपन भर जाय पेट

अपन भर जाय पेट
दूसर के कोन करे चेत।

यहा जमाना आ गे हे।
सुवारथ पन छा गे हे।

मंदहा मन सन जाबे तब।
सादा भोजन नइ पाबे तब।

मांसाहारी खावय मंदे-माँस।
शाकाहारी देखय चुप्पेचाप।

रतिहा के बेरा,होवय अबेरहा।
घर जाये बर गाड़ी बिगड़हा।

तीजा के बेरा सगा के घर।
मंदहा पावय मजा अबड़।

सादा मनखे लांँघन मरै।
अँतड़ी वोकर नंगत जरै।

पेटभर जेवन जेवय बर।
घर म परम आनंद पाए बर।

जीतेन्द्र निषाद"चितेश"

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