नवा जमाना आ गे हे

नवा जमाना आ गे हे,नवा फैशन भा गे हे।
कृष्ण के चोला पहिर पौंड्रक मन छा गे हे।

नंगत के सम्हरावै अउ करै दिखावापन।
कलयुग म मनखे मन लइका ल अपन।

कोनो बनावै राधा,कोनो बनावै कृष्णा।
फेर सीख नइ दे पाइन तजे बर तृष्णा।

नकली चोला पहिर कइसे कृष्णा बन पाही? 
जब मानवता के गुण लइका म नइ समाही।

कृष्ण असन काम म पग पग देय ल परही परीक्षा।
अउ जनहित बर प्राण देके करे ल परही समीक्षा।

जीतेन्द्र निषाद"चितेश"

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