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हरेली गीत

*हरेली* -------------- जिनगी ला महकाय हरेली।  पिंवरा धान असन अंतस ला खातू दे हरियाय हरेली। । ढरकत आँसू बीच ददरिया के सुर घलो लमाय हरेली।   लोंदी खवा गऊ-गरवा ला  पबरित नता जनाय हरेली। । खेती के औजार पूज के गुन माने ल सिखाय हरेली।  मन के  बल  के गेंड़ी ले बिपदा-चिखला नहकाय हरेली।। गुरतुर-गुरतुर गुरहा चीला के संग अबड़ मिठाय हरेली। बइगा मन के मंत्र जाप ले धरम धजा फहराय हरेली। ।  लीम डार ला खोंच घरो- घर पर्यावरण बचाय हरेली।  सबो डेहरी खिला ठेंस के सुख-सम्मत अमराय हरेली। । भाँठा-चौंरा, गली-गुड़ी मा सुनता ला बगराय हरेली।  गाँव-गँवई अउ कृषि संस्कृति ला सुघ्घर उजराय हरेली। ।                ---दीपक निषाद---बनसाँकरा (सिमगा)