हरिगीतिका छंद

                    हरिगीतिका छंद

सुन संगवारी मोर द्वारी,खोजथस का रोज के ।
का सोन मिलही मोर घर मा,झाँकथस का खोज के।।
अब चोरहा कस काम करके,मीत झन बदनाम कर।
सब छोड़ के अलकर करम ला,मेहनत के काम कर।।

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