शंकर छंद Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps September 27, 2020 शंकर छंदमन हा मइला कतको झन के,देह हवय निरोग।रोय कबीरा जब ये देखे,करय योगी भोग।अब का होही जनमानस के,करय अलकर संत। चेत हराही मनखेमन के,दान पुन के अंत। Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
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