दोहे रक्तदान के काम मा,सरलग कर सहयोग। अपन लहू ला दान कर,परमारथ सुख भोग।। रक्तदान के अहमियत,एक सिखावै पाठ। पर के जिनगी नित बचा,झन कर हिरदै काठ।। जगही जब संवेदना,पर के दुख ला देख। मानवता तभ्भे रही,मनखे तरी सरेख।। मानवता के गुण बिना,रक्तदान नइ होय। कतको मनखे प्राण ला,बिपत परे मा खोय।। धर सकथे विपदा कभू,दुर्घटना कस रूप। प्रसवकाल के संग मा,रक्तस्त्राव कस कूप।। हीमोफिलिया संग मा,ल्यूकिमिया के रोग। अइसन रोगी ला लगै,सदा लहू के भोग।। सदा जरूरतमंद बर,अपन लहू ला देव। इसन रक्तदाता सदा,अघुवा रह स्वयमेव।। जीयत भर देके लहू,अपन कमा ले साख। फेर मरे के बाद तैं,होबे संगी राख।। जीतेन्द्र निषाद 'चितेश' सांगली,जिला-बालोद
एक नवा अब आ गे रोग। कोरोना काहत हें लोग।। फइलत हावय जम्मों देश। होगे सबला जबर कलेश।। खाइन चमगादड़ अउ साँप। चीन सकिस नइ एला भाँप।। कोरोना के फइलय रोग। चीनी करय अबड़ के सोग।। जब कचलहा रहय गा माँस। अब्बड़ खावय बिक्कट हाँस।। ले लिस कतको झन के प्रान। तब समझिन गा चीन जपान।। सर्दी खाँसी संग बुखार। जब छींकाशी आवय यार।। टिश्यू पेपर करव प्रयोग। नइ फइले दूसर ला रोग।। जब रोगी होवय गंभीर। साँस लेय बर होय अधीर।। तड़पय जस बिन पानी मीन। इह ओकर लक्छन गउकीन।। खेवन-खेवन धोवव हाथ। सेनिटाइजर साबुन साथ।। रोज्जे मुँह मा मास्क लगाव। कोरोना ला दूर भगाव।। तीन फीट दुरिहा मा जाव। तभ्भे ककरो सँग बतियाव।। अइसन संदेशा बगराव। जन-जन के तुम प्रान बचाव।। जेवन जेवव सादा भात। पीयव पानी तातेतात।। तन ला रखव सदा सब गर्म। सुग्घर करव सदा हर कर्म।। कोरोना के लक्क्षन पाय। डॉक्टर कर जी तुरत दिखाय।। सबले बढ़िया इही उपाय। कोरोना ला दूर भगाय।।
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