अब आवत हे चुनाव मीठलबरा मन ईमानदारी से करही लगाव। हितवा बनके,भोकवा समझके,जनता के करही भारी भरिहाव। विकास के गंगा बहा दीही हितैषी मन गोठे-गोठ म।असल के धरातल म विकास ल देखके पड़ जाबे सोच म। करही भारी वादा मुखिया बने बर जुबान के राशनकार्ड म। नपा लव नाली-कलामंच बनाय बर अपन गली,अपन वार्ड म। मुखिया बने के बाद असल खेला होही ऑडिटर के दफ्तर म। धरसा ह रद्दा बन जाही बिना मुरुम के कमीशन के डम्फर म। गली ह नाली बन जाही,बोहाही घर के मुंँहाटी म निरमल धारा। सारा-भांँटो के गारी ले कम नइ होय पारा म भाईचारा। अब परजा घलो फोकट के खाय बर सरबस टकरहा होगे। प्रत्याशी नंगत खर्च करथे सुवारथ म पद बर हफरहा होगे। जे लगाही अपन कमाई के असल ल राजनीति के फसल म। वसलूही चार सौ बीसी करके ईमानदारी से अपन अकल म। ग्राम सभा म गाँव के बुनियादी सुविधा के बारे म बिना खोट के। मुखिया ल उही बोल सकथे जे वोट करे रही बिना नोट के। मानवता,ईमानदारी नइ मिलय कलजुगी मनखे के तरी घट म। कइसे विकास के गंगा बोहाही संगी गांव-गली अवघट म। निःसुवारथ काम करही गाँव के जे मुखिया तभ्भे नवा इतिहास गढ़ही। परजा घलो बिना लोभ के वोट दीही सोच-समझके तभ्भे गाँव तर...