पंचायत चुनाव
अब आवत हे चुनाव मीठलबरा मन ईमानदारी से करही लगाव।
हितवा बनके,भोकवा समझके,जनता के करही भारी भरिहाव।
विकास के गंगा बहा दीही हितैषी मन गोठे-गोठ म।असल के धरातल म विकास ल देखके पड़ जाबे सोच म।
करही भारी वादा मुखिया बने बर जुबान के राशनकार्ड म।
नपा लव नाली-कलामंच बनाय बर अपन गली,अपन वार्ड म।
मुखिया बने के बाद असल खेला होही ऑडिटर के दफ्तर म।
धरसा ह रद्दा बन जाही बिना मुरुम के कमीशन के डम्फर म।
गली ह नाली बन जाही,बोहाही घर के मुंँहाटी म निरमल धारा।
सारा-भांँटो के गारी ले कम नइ होय पारा म भाईचारा।
अब परजा घलो फोकट के खाय बर सरबस टकरहा होगे।
प्रत्याशी नंगत खर्च करथे सुवारथ म पद बर हफरहा होगे।
जे लगाही अपन कमाई के असल ल राजनीति के फसल म।
वसलूही चार सौ बीसी करके ईमानदारी से अपन अकल म।
ग्राम सभा म गाँव के बुनियादी सुविधा के बारे म बिना खोट के।
मुखिया ल उही बोल सकथे जे वोट करे रही बिना नोट के।
मानवता,ईमानदारी नइ मिलय कलजुगी मनखे के तरी घट म।
कइसे विकास के गंगा बोहाही संगी गांव-गली अवघट म।
निःसुवारथ काम करही गाँव के जे मुखिया तभ्भे नवा इतिहास गढ़ही।
परजा घलो बिना लोभ के वोट दीही सोच-समझके तभ्भे गाँव तरक्की करही।
जीतेन्द्र निषाद'चितेश'
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