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Showing posts from April, 2025

गोरी

मया के बंधना म बँधे हँव गोरी तोर संग म,तोर संग म। जीयत मरत ले छूटे झन,तोर संग-मोर संग हरदम। मया के गोठ गोठियाले गोरी,मोर संग हरदम हरदम। बिखहर झन कर जिनगी ल,रीस करु ले हरदम। जेकर सजनी कर मया के धन हे,ओकर सजना धनवान हे। मया के बिन निच्चट कंगला हँव,मोर सजनी नादान हे। हिजगा के आगी ले भभकथे गोरी,अपनेच छितका छानी ओ। मया के पानी ले बुझाही,जभ्भे,घर बाँधा म रइही मितानी ओ। जीतेन्द्र निषाद'चितेश'

धानी बेटी

धानी ओ धानी तैंहा जाबे नानी घर। अउ ममा-मामी के पाबे मया अड़बड़। ये गुडिया रानी,मोर बिटिया रानी। ददा सुनावै तोर नाना गाँव के कहानी। घर के आघू म बूढ़ादेव के असीस छँइहाँ। गंगा मइया के दरसन तरिया म भइया। डुबकी लगाके,पाप धोथे गाँव भर। धानी ओ धानी तैंहा जाबे नानी घर। महाशिवरात के शिव दरबार म जमघट लगथे, दुर्गा दाई के पबरित"धानी"म जोत जलथे। मन म होथे उमंग हर घड़ी झलक पाय बर। धानी ओ धानी तैंहा जाबे नानी घर। अन्नपूर्णा के भंडार भरे हे,भोथली गाँव म। ढेस के खेती ले माया मिले अपार हर ठाँव म। धानी के ममा घर हवय महिंद्रा ट्रैक्टर। धानी ओ धानी तैंहा जाबे नानी घर। जीतेन्द्र निषाद"चितेश"