गोरी

मया के बंधना म बँधे हँव गोरी तोर संग म,तोर संग म।
जीयत मरत ले छूटे झन,तोर संग-मोर संग हरदम।

मया के गोठ गोठियाले गोरी,मोर संग हरदम हरदम।
बिखहर झन कर जिनगी ल,रीस करु ले हरदम।

जेकर सजनी कर मया के धन हे,ओकर सजना धनवान हे।
मया के बिन निच्चट कंगला हँव,मोर सजनी नादान हे।

हिजगा के आगी ले भभकथे गोरी,अपनेच छितका छानी ओ।
मया के पानी ले बुझाही,जभ्भे,घर बाँधा म रइही मितानी ओ।

जीतेन्द्र निषाद'चितेश'

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