धानी बेटी

धानी ओ धानी तैंहा जाबे नानी घर।
अउ ममा-मामी के पाबे मया अड़बड़।
ये गुडिया रानी,मोर बिटिया रानी।
ददा सुनावै तोर नाना गाँव के कहानी।

घर के आघू म बूढ़ादेव के असीस छँइहाँ।
गंगा मइया के दरसन तरिया म भइया।
डुबकी लगाके,पाप धोथे गाँव भर।
धानी ओ धानी तैंहा जाबे नानी घर।

महाशिवरात के शिव दरबार म जमघट लगथे,
दुर्गा दाई के पबरित"धानी"म जोत जलथे।
मन म होथे उमंग हर घड़ी झलक पाय बर।
धानी ओ धानी तैंहा जाबे नानी घर।

अन्नपूर्णा के भंडार भरे हे,भोथली गाँव म।
ढेस के खेती ले माया मिले अपार हर ठाँव म।
धानी के ममा घर हवय महिंद्रा ट्रैक्टर।
धानी ओ धानी तैंहा जाबे नानी घर।

जीतेन्द्र निषाद"चितेश"

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