हमर सरपंच
हमर सरपंच अब गंजहा-मंदहा होगे जी। का करबे होशियार रहिके गदहा होगे जी। चुनाव जीतत ले बने,बने के करिस प्रपंच। जीते के बाद बना दिस मंदहा बर रंगमंच। खरा सोना मनखे,संगत म लोहा बरोबर, गाँव के विकास बर भारी जंगहा होगे जी। हमर सरपंच अब गंजहा-मंदहा होगे जी। इसने म कइसे होही तरक्की चारों कोती? सड़क,नाली-पुल के संग नइये गाँव म जोती। सरकारी दाहरा म,सरकारी मोती बर विभाग म, भागमभाग के डुबकी लगइया अपंगहा होगे जी। हमर सरपंच अब गंजहा-मंदहा होगे जी। अतका दिन होगे गाँव म नइ हे ओपन जिम। सोलर लाइट के बिना चँउक लागै सिम सिम। अरे! नान्हे-नान्हे गाँव म अइसे का करिन ? ये सुविधा पाँच साल पहिली सँझकेरहा होगे जी। हमर सरपंच अब गंजहा-मंदहा होगे जी। जीतेन्द्र निषाद"चितेश"