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Showing posts from May, 2025

हमर सरपंच

हमर सरपंच अब गंजहा-मंदहा होगे जी। का करबे होशियार रहिके गदहा होगे जी। चुनाव जीतत ले बने,बने के करिस प्रपंच। जीते के बाद बना दिस मंदहा बर रंगमंच। खरा सोना मनखे,संगत म लोहा बरोबर, गाँव के विकास बर भारी जंगहा होगे जी। हमर सरपंच अब गंजहा-मंदहा होगे जी। इसने म कइसे होही तरक्की चारों कोती? सड़क,नाली-पुल के संग नइये गाँव म जोती। सरकारी दाहरा म,सरकारी मोती बर विभाग म, भागमभाग के डुबकी लगइया अपंगहा होगे जी। हमर सरपंच अब गंजहा-मंदहा होगे जी। अतका दिन होगे गाँव म नइ हे ओपन जिम। सोलर लाइट के बिना चँउक लागै सिम सिम। अरे! नान्हे-नान्हे गाँव म अइसे का करिन ? ये सुविधा पाँच साल पहिली सँझकेरहा होगे जी। हमर सरपंच अब गंजहा-मंदहा होगे जी। जीतेन्द्र निषाद"चितेश"

सुघ्घर सांगली

हमर सांगली,सुघ्घर सांगली। मया मिलै जिहाँ गली-गली। दाई-दीदी अउ भाई-बहिनी के। पबरित नत्ता बर जगजननी के। फेर मानवता के पाठ काबर भूल चली? हमर सांगली,सुघ्घर सांगली। मसीहा के रूप म नान्हे उमर म। जस करइया सदा मिलय हर घर म। इह आशा-विश्वास ले रखै मरजाद ल। इरखा-द्वेष बिन सदा सुनै फरियाद ल। फेर नियाव करइया मन झन होवय नकली। हमर सांगली,सुघ्घर सांगली। खपचलहा नइ मिलै,दोगला नइ मिलै। बखत परे म शकुनी चाल,नइ चलै। अमृत के नाँव म फंदा नइ डारै पर के गर म। सरबस भलमानस मिलै हर ठउर म। फेर मदद ल बिसारके,झन खाँचा खनै असली। हमर सांगली,सुघ्घर सांगली। जीतेन्द्र निषाद"चितेश"

माँग पत्र

मोर गाँव बर माँग पत्र, कविता के जरिया ले। हमर छत्तीसगढ़ के आदरणीय मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय। बालोद जिला के जम्मो केंवट मन ह बड़ आदर से हें बलाय। गाँव भिलाई म झूमर-झूमर के भौंरा स्वागत गीत सुनाय। राम बरोबर विष्णुदेव साय,केंवट कुनबा म आज तो आय। दरसन करत हें शबरी बरोबर केंवट कुनबा के जम्मो दास-दासी। मया के जूठा बोइर खाइन वनवासी,तरगिन गाँव भिलाईवासी। मोर नाँव जीतेन्द्र,मुख्यमंत्री जी,सांगली गाँव बर अपन मया बरसाव। केंवट समाज के भवन बर,दस लाख के घोषणा कर दव एक घांँव।। कोनो नेता,अभिनेता,समाज सेवक मोर अरजी मुख्यमंत्री सो पहुँचाव। अउ स्वीकृति करा के,ये चारण के मुख ले जिनगी भर वाहवाही पाव। इही अरजी हे ये सेवक के सुन लव मोर गोहार। किरपा होही तुंँहर,कर लव मोर अरजी स्वीकार। जीतेन्द्र निषाद"चितेश" ग्राम-सांगली,पोस्ट-पलारी तह.-गुरुर,जिला-बालोद(छ. ग.)