सुघ्घर सांगली
हमर सांगली,सुघ्घर सांगली।
मया मिलै जिहाँ गली-गली।
दाई-दीदी अउ भाई-बहिनी के।
पबरित नत्ता बर जगजननी के।
फेर मानवता के पाठ काबर भूल चली?
हमर सांगली,सुघ्घर सांगली।
मसीहा के रूप म नान्हे उमर म।
जस करइया सदा मिलय हर घर म।
इह आशा-विश्वास ले रखै मरजाद ल।
इरखा-द्वेष बिन सदा सुनै फरियाद ल।
फेर नियाव करइया मन झन होवय नकली।
हमर सांगली,सुघ्घर सांगली।
खपचलहा नइ मिलै,दोगला नइ मिलै।
बखत परे म शकुनी चाल,नइ चलै।
अमृत के नाँव म फंदा नइ डारै पर के गर म।
सरबस भलमानस मिलै हर ठउर म।
फेर मदद ल बिसारके,झन खाँचा खनै असली।
हमर सांगली,सुघ्घर सांगली।
जीतेन्द्र निषाद"चितेश"
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