होवइया बहुरिया चलय ससुरार
होवइया बहुरिया चलय ससुरार
गजब के आ गेहे अब नवा दिन,होवइया बहुरिया चलय ससुरार।
दाई-ददा के संग,भाई-भौजी के संग,मयारू के नगरिया म पहिली बार।
बिन बिहाव के,फलदान के पहिली।
का बने,का गिनहा,देखे बर पगली।
कलजुग के नवा रीत निभाय बर,मयारू के दुवरिया म पहिली बार।
होवइया बहुरिया चलय ससुरार,होवइया बहुरिया चलय ससुरार।
का धुरपइयांँ पाँव मा बिहाव होके आबे?
बिहाव के पहिली,धुर्रा उड़ाके मइके जाबे।
केदे हाथ मा हाँथा देबे,केदे भिथिया?मयारू के कुरिया म पहिली बार।
होवइया बहुरिया चलय ससुरार,होवइया बहुरिया चलय ससुरार।
अब कलजुग के पहावत बेरा मा,ये रीत घलो ठीक हे।
फेर जुन्ना सियान मन कइथे,ये संस्कार खीक हे।
समय के संग चलव अउ जिनगी जी लव,मयारू के दुनिया म पहिली बार।
होवइया बहुरिया चलय ससुरार,होवइया बहुरिया चलय ससुरार।
जीतेन्द्र निषाद'चितेश'
सांगली,जिला-बालोद
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