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Showing posts from July, 2025

चापलूस

चापलूसों की फौज खड़ी है,हर गाँव,हर शहर में। सत्यवादी लोगों की कमी है,हर छाँव,हर डगर में। मुँहफट आदमी की सीधी बात जहर लगती है। दवाई की तरह कड़वी हो मगर असर करती है। स्वाभिमान जिसमें जिंदा है,वही आज शर्मिंदा है। कलयुग में अक्सर अच्छे लोगों की होती निंदा है। निर्लज्ज को कोई फर्क नहीं पड़ता,हमारी नजर में। चापलूसों की फौज खड़ी है,हर गाँव,हर शहर में। शादीशुदा महिला और पुरुष आकर्षित हो रहे हैं। पर पुरुष या महिला को देखकर समर्पित हो रहे हैं। पति-पत्नि जानी दुश्मन,प्रेमिका,प्रेमी के लिए। तलाक हो रहा है,हत्या,हवस की पूर्ति के लिए। अब समर्पण कहाँ दिखता है पति-पत्नि हमसफर में? चापलूसों की फौज खड़ी है,हर गाँव,हर शहर में। जीतेन्द्र निषाद"चितेश"

ईडी ने छापा मारा

ईडी ने छापा मारा,अंधभक्त ने पुतला फूँका। बिना सच्चाई जाने चक्काजाम से आवागमन रुका। सत्ताधारी नेताओं के घर ईडी क्यों छापा नहीं मारती? विरोधियों के घर में ही अक्सर क्यों रात गुजारती? क्या सत्ताधारी दल के नेतागण ईमानदार होते हैं? इस विभाग पर विश्वास नहीं होता,ये देख हम रोते हैं। सरकार की कठपुतली के मुँह पर हमने थूका। ईडी ने छापा मारा,अंधभक्त ने पुतला फूँका। बिना सच्चाई जाने,चक्काजाम से आवागमन रुका। बिना पद के हजारों करोड़ का लेन-देन कहाँ से हुआ? शराब की फसल या महादेव सट्टा बुक जुआ से हुआ। सबूत चाहिए सजा दिलाने के लिए ईडी सरकार को। ईमान तैयार है न्याय बाजार में बिकने,देख ख़रीददार को। क्या सच में सजा मिलेगी? हमने कोयल की तरह कूका। ईडी ने छापा मारा,अंधभक्त ने पुतला फूँका। बिना सच्चाई जाने,चक्काजाम से आवागमन रुका। जीतेन्द्र निषाद'चितेश'

एक पेड़ माँ के नाम

लगाओ,एक पेड़ माँ के नाम। निर्लज्ज मुखिया बोले सरेआम। छलिया सरकार,कटवाकर हसदेव जंगल। रायगढ़ में भी करके भारी वन अमंगल। हितैषी बनकर कहती है सुबह-शाम। लगाओ,एक पेड़ माँ के नाम। उद्योगपति के संग,अपनी जेब भरे। काट के जंगल,कोयला खनन करे। छलिया नेता बोले,जब पाए उचित दाम। लगाओ,एक पेड़ माँ के नाम। काम नहीं हैं जनता के पास। अंधभक्त लोग हैं तुम्हारे ख़ास। जो देते हैं मुफ्त ज्ञान तमाम। लगाओ,एक पेड़ माँ के नाम। जब कथनी-करनी हो एक समान। बिना पेड़ काटे सरकार करे काम महान। मैं करूँगा समर्थन करके सलाम। लगाओ,एक पेड़ माँ के नाम। जीतेन्द्र निषाद'चितेश' सांगली,जिला-बालोद