एक पेड़ माँ के नाम

लगाओ,एक पेड़ माँ के नाम।
निर्लज्ज मुखिया बोले सरेआम।

छलिया सरकार,कटवाकर हसदेव जंगल।
रायगढ़ में भी करके भारी वन अमंगल।
हितैषी बनकर कहती है सुबह-शाम।
लगाओ,एक पेड़ माँ के नाम।

उद्योगपति के संग,अपनी जेब भरे।
काट के जंगल,कोयला खनन करे।
छलिया नेता बोले,जब पाए उचित दाम।
लगाओ,एक पेड़ माँ के नाम।

काम नहीं हैं जनता के पास।
अंधभक्त लोग हैं तुम्हारे ख़ास।
जो देते हैं मुफ्त ज्ञान तमाम।
लगाओ,एक पेड़ माँ के नाम।

जब कथनी-करनी हो एक समान।
बिना पेड़ काटे सरकार करे काम महान।
मैं करूँगा समर्थन करके सलाम।
लगाओ,एक पेड़ माँ के नाम।

जीतेन्द्र निषाद'चितेश'
सांगली,जिला-बालोद

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