जुमला लगाथे मोर गोरी रोपा
जुमला लगाथे मोर गोरी ह रोपा।
मुड़ म सँवारे जिम्मेदारी के खोपा।
टुपटुप कलेचुप रोपा लगावत।
मुस मुस उदुपले पनिया माँगत।
गड़गे सजना,बड़जन खोभा।
जुमला लगाथे मोर गोरी ह रोपा।
होगे अलहन,बड़जन,जी के काल।
कइसे कमाहूंँ एसो?मोर हाल बेहाल।
नइ हे कमइया,घर हे आरुग खोखा।
जुमला लगाथे मोर गोरी ह रोपा।
महँगाई मारै सजनी सँवारै घर ल।
सजना लागै जोहार देख हुनर ल।
मेहनत के ये रूप चमकै अनोखा।
जुमला लगाथे मोर गोरी ह रोपा।
मुड़ म सँवारे जिम्मेदारी के खोपा।
जीतेन्द्र निषाद"चितेश"
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