ट्रैफिक जाम होगे जी
हाय!राम ट्रैफिक जाम होगे जी।
दुरुग ले निकलत जी हलाकान होगे जी।
बइठे बइठे बीते सुबह अउ शाम।
घेरी बेरी लेवय राम,राम के नाम।
इही एक्के ठन बस म,बस काम होगे जी।
हाय!राम ट्रैफिक जाम होगे जी।
हाथ गोड़ म घलो पीरा भरगे।
दचाका म चक्का नंगत गड़गे।
ये देख के सच म खवई पियई हराम होगे जी।
हाय!राम ट्रैफिक जाम होगे जी।
गड़ौना मन कार ल,आघू म टेका दिन।
बस म बैठइया मन एती वोती फेंका गिन।
तरवा फटगे कका दाई के अउ काम तमाम होगे जी।
हाय!राम ट्रैफिक जाम होगे जी।
कोन ल दोष देबे जब शासन सुते परे हे तब?
दचाका ल बिना स्वारथ के कोन पाटही अब?
इही सपना देखत नींद खुलगे अउ विराम होगे जी।
हाय!राम ट्रैफिक जाम होगे जी।
दुरुग ले निकलत जी हलाकान होगे जी।
जीतेन्द्र निषाद"चितेश"
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