अब देश की क्या हालत हो गई
अब देश की क्या हालत हो गई?
सच बोलने वाले की मौत हो गई।
पत्रकार मुकेश हो या फिर"चितेश" हो।
इनके हत्यारें भी अदालत में पेश हों।
सजा के लिए ऊँच-नीच का भेद न हो।
सबूत के अभाव में छूट का खेद न हो।
तो फिर हत्या किसने की?यहाँ हद हो गई।
सच बोलने वाले की मौत हो गई।
गोधरा कांड के अपराधी,बड़े नेता बन गए।
निर्दोष लोग दोषी बनकर जेल में सड़ गए।
फुटपाथ में सोये लोग,गाड़ी में दबकर मर गए।
सलमान जैसे धनी लोग कानून से बचकर निकल गए।
तो फिर ये पूरी घटना अपने आप में उलझन हो गई।
सच बोलने वाले की मौत हो गई।
विद्यालय,पुल जर्जर,उच्च अधिकारी अपने में खो गए।
मासूम बच्चे,आम नागरिक मौत की बाँहों में सो गए।
इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?यह एक बड़ा सवाल है?
विभागीय मंत्री ने कहा कार्यवाही होगी,मौत का मलाल है।
निम्न कर्मचारी को दोषी बताकर,सरकार मौन हो गई।
सच बोलने वाले की मौत हो गई।
जीतेन्द्र निषाद'चितेश'
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