मटकी ल फोड़


मटकी ल फोड़,पइसा बटोर,
सुन ले संगी मोर।
कोशिश कर ले आके तहूँ ,
एक घाँव जी तोड़।

डोकरी घलो हवय रेस म,
डोकरा घलो हवय टेस म।
आँखी म बाँध मया के पट्टी,
मया के बंधना ल छोड़।

जिनगी का हे?सुख-दुख के मेला,
ये तन का हे? माटी के ढेला।
ये जग ल छोड़ जाबे अकेला,
हरि ले नाता जोड़।

सबले बड़का ऊपरवाला खिलाड़ी,
बाकी जम्मो झन हवय अनाड़ी।
करम के लाठी तोर हाथ हवय ,
लक्ष्य ल बेध,मुँह झन मोड़।

कइसन मटकी?गरब के मटकी,
सत के रद्दा म फोड़ झटकी।
कइसन पइसा?हरिनाम के पइसा,
बटोर झटकी,तर जाही चोला तोर।

जीतेन्द्र निषाद'चितेश'

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