नेतामन भगवान होगे
कलजुग म नेता मन भगवान होगे जी।
हरेक मंच म उही मन बिराजमान होगे जी।
राजनीति म जे लफरहा खिलाड़ी।
पावै बड़ मान,होवै ओकर पुछारी।
गाँव-शहर म चमचा मन बलावै।
धरम के मंच म धर्मात्मा बन जावै।
फेर दया धरम बिन महात्मा सही महान होगे जी।
कलजुग म नेता मन भगवान होगे जी।
बने मनखे के गोठ म ताली नइ बाजै।
राजनेता के लबारी म परजा ह नाचै।
गिरगिट घलो शरमा जाय रंग बदले म।
राजनेता नइ शरमाय घोषणा के चाल चले म।
फेर घोषणा पूरा करै बिन,सुवागत सम्मान होगे जी।
कलजुग म नेता मन भगवान होगे जी।
जब पधारै कोनो कार्यक्रम के ठीहा म।
माई पहुना बन,दिन रहै या रतिहा म।
तलवा चाटै गाँव-शहर म चापलूस बनके।
पढ़-लिख के हुसियार मन नेता मन के।
फेर गाँव घर के मनखे ल पहुना नइ बनाय,का शैतान होगे जी?
कलजुग म नेता मन भगवान होगे जी।
जीतेन्द्र निषाद'चितेश'
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