मोर नोनी

छुनुक-छुनुक पैरी बाजे तोर नोनी।
पाँव मा सुघ्घर साजे मोर नोनी।

कका किंजारे सौंहे-सौंहे तोला,
रोज अटल चऊँक ह बाट जोहे तोला।

किलकारी तोर जोश भरे मन मा,
जीवन अमृत लागे एक क्षण मा।

अइसे हे मधुर मुस्कान तोर,
दुखी मन सुखी हो जाथे मोर।

अटल चऊँक के अंगना गमकत हे,
नोनी के रूप फूल जइसे लवकत हे।

भौंरा बतावै गाँव भर मा घूम-घूम के,
कोयली कूके बाग मा झूम-झूम के।

सुनके गुरतुर बोली तोर नोनी,
चिरई चहके,मैं भाव-विभोर नोनी।

जीतेन्द्र निषाद 'चितेश'













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