दीवाना था तेरे प्यार में

भावपूर्ण स्मृति श्रदांजलि
स्वर्गीय सुरेंद्र साहू (ओझागहन)

दीवाना था इस कदर,तेरे प्यार में,
मेरा यार सुरेंदर।
मरते दम तक भूल न सका,
चाहत थी इस कदर।

तूने घर बसा लिया अपना,
फिर बना लिया सजना।
मेरे यार की गलती थी,
किस्मत उससे जलती थी।

पता नहीं क्यों चली गई?
सुरेंदर को तलाक देकर।
जीवन के आखिरी पल में रोया,
अपनी पत्नी को याद कर।

मरते दम तक भूल न सका,
चाहत थी इस कदर।

-तुम्हारे यार की कलम से
जीतेन्द्र निषाद 'चितेश'



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