सारी के बिहाव म

सारी के बिहाव म,भांँटो नाचे अकेल्ला।
सजनी बिन सारी प्यारी अउ सारी भागै पल्ला।

आके सारी,मोर संग नाच ले कनिहा जोरी-जोरी।
साढ़हू घलो संग म हावय,मजा आही थोरी-थोरी।

बिहाव म डेढ़ सास हे,नाच लव बेरा खासमखास हे।
बड़का साढ़हू नइ नाचे,लागे अभी तीजा उपास हे।

सास लागे महतारी बरोबर,फेर कइथे रटरट भारी।
मोर छितका कुरिया म लागे,तोर बेटी राजकुमारी।

गंजहा नइ हँव,मंदहा नइ हँव,हांँवव मैं बेलबेलहा।
फेर बारी-बखरी बुता करथँव,नइ राहंँव मैं ठेलहा।

जीतेन्द्र निषाद 'चितेश'

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